जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में शहीद जवान जिलाजीत यादव का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव जौनपुर के धौरहरा इजरी लाया गया है। यहां गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। जिलाजीत तीन माह पहले पिता बने थे। परिवार वालों ने शहीद के पार्थिव शरीर के पास बेटे जीवांश को रखा तो हर किसी के लिए यह भावुक क्षण था। शहीद की पत्नी व परिवारवालों का रो-रोकर बुरा हाल है। अंतिम दर्शन के लिए हजारों लोग हाथों में तिरंगा लेकर पहुंचे हैं। लोग जिलाजीत की शहादत पर भारत माता के जयघोष कर रहे हैं। शहीद का गोमती तट पर स्थित रामघाट पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार होगा।

अंतिम दर्शन के लिए उमड़े लोग।

शहीद जवान अपने परिवार का इकलौता बेटा था

जलालपुर थाना क्षेत्र के धौरहरा इजरी गांव निवासी कांता यादव की चार संताने थीं। तीन बेटियों के अलावा उनका इकलौता बेटा जिलाजीत यादव साल 2014 में सेना में भर्ती हुआ था। वर्तमान में वे आरआर (राजस्थान राइफल्स) 53 बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात थे। साल 2017 में उसकी शादी हुई थी। तीन माह पहले जिलाजीत पिता बने थे। आखिरी बार वे जनवरी माह में गांव आए थे। दो साल पहले पिता कांता यादव का निधन हो गया था।

शव यात्रा के लिए सजाया गया वाहन।

मंगलवार रात दो बजे हुई मुठभेड़

जानकारी के अनुसार, मंगलवार रात 2 बजे पुलवामा में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में सैनिक जिलाजीत शहीद हो गए थे। उनके एक साथी को भी गोली लगी। सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया तो घटनास्थल से एके-47, ग्रेनेड के साथ ही अन्य आपत्तिजनक सामान भी बरामद हुए थे।



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यह तस्वीर जौनपुर की है। शहीद जवान जिलाजीत यादव का पार्थिव देह उनके पैतृक गांव लाया गया। मंगलवार रात पुलवामा में हुए मुठभेड़ में जिलाजीत शहीद हुए थे।


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