महज 5505 परीक्षार्थियों से शुरू हुए हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) का कारवां 2020 में 56 लाख छात्र-छात्राओं तक पहुंचा है। 99 साल के इतिहास में बोर्ड ने कई बदलाव किए। लेकिन, साल 2020 में सात बड़े बदलाव हुए। शनिवार को दूसरा अवसर था, जब बोर्ड परीक्षा का परिणाम प्रयागराज स्थित मुख्यालय के बजाय राजधानी लखनऊ से जारी किया। साल 2007 में बसपा शासनकाल में पहली बार परिणाम लखनऊ से जारी किया था। हालांकि, इंटरमीडिएट का रिजल्ट प्रयागराज से ही जारी हुआ था।
1923 में बोर्ड की हुई थी स्थापना
बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने बताया किमाध्यमिक शिक्षा परिषद की स्थापना आजादी से पहले साल 1923 में हुई थी। तब इंटरमीडिएट में पांच और हाईस्कूल में 5500 छात्र पंजीकृत हुए थे। वहीं, साल 2020 में हाईस्कूल और इंटरमीडिए को मिलाकर 56 लाख से अधिक परीक्षार्थी पंजीकृत हुए थे। हाईस्कूल में 81.96% अंक लाकर बागपत की रिया जैन ने यूपी टॉप किया है। वहीं, इंटरमीडिएट में बागपत के ही छात्र अनुराग मलिक ने 97% अंक पाकर प्रदेश में टॉप किया है।
बोर्ड द्वारा इस सालतीन बड़े बदलाव-
- सिलाई वाली कॉपी का इस्तेमाल: मथुरा, प्रयागराज, बलिया, मुजफ्फरनगर और हरदोई में पहली बार सिलाई वाली कॉपी से परीक्षा कराई गई। ताकिपरीक्षा केंद्रों पर कॉपियों में होने वाली हेराफेरा रोकी जा सके। इसे आगामी बोर्ड परीक्षा में अन्य जिलों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
- डिजिटिल अंकपत्र-प्रमाण पत्र: बोर्ड पहली मर्तबा डिजिटल हस्ताक्षर वाले अंकपत्र औरप्रमाण पत्र जारी कर रहा है। यह डिजिटल अंकपत्र-प्रमाण पत्र छात्रों को परिणाम जारी होने के दो से तीन दिन के भीतर स्कूल के प्रधानाचार्य के माध्यम से मिल जाएगा।
- इंटर के छात्रों को कंपार्टमेंट का मौका: इंटरमीडिएट में एक विषय में फेल होने वाले परीक्षार्थी को पहली बार कंपार्टमेंट में शामिल होने का मौका दिया जा रहा है। अभी तक यह व्यवस्था हाईस्कूल के छात्रों के लिए थी।
यह बदलाव भी अहम-
- 10वीं और 12वीं की कॉपियों की लाइनें चार अलग-अलग रंगों में थी।
- इस बार ऑनलाइन लिए जाएंगे स्क्रूटनी के आवेदन।
- छात्रों में तनाव दूर करने को लेकर टोल फ्री नंबर जारी किए गए।
- सूचनाओं के आदान प्रदान के लिए वॉट्सऐप ग्रुप बनाए गए।
पिछले साल की तुलना में कम थे परीक्षा केंद्र
इस साल हाईस्कूल में कुल 30,24,480 छात्र पंजीकृत थे जिसमें से 27,972,656 ने परीक्षा दी थी। इनमें 23,09,802 छात्र पास हुए हैं। पास होने वालों में 11,90,888 लड़के और 11,18,914 लड़कियां हैं। इस तरह लड़कों का पास प्रतिशत 79.88 और लड़कियों का पास प्रतिशत 87.29 है। यानी 7.41% लड़कियां ज्यादा पास हुई हैं। वहीं, इंटरमीडिएट में 25,86,339 छात्र पंजीकृत थे, जिनमें 24,84,479 ने परीक्षा दी थी। इसमें से 74.63% यानी 18,54,099 छात्र पास हुए हैं। इनमें 95,92,23 लड़के और 89,48,76 लड़कियां हैं। इस तरह 68.88% लड़के और 81.96% लड़कियां पास हुई हैं। लड़कियों का पास प्रतिशत लड़कों की तुलना में 13.08 प्रतिशत अधिक है। इस बार बोर्ड परीक्षा के लिए कुल 7784 केंद्र बनाए गए थे, जो 2019 की तुलना में 570 कम थे।
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