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कोविड-19 को लेकर बीएचयू में खुला काउंसिलिंग सेंटर, प्रशासन की चेतावनी- तब्लीगी जमात से लौटे लोग सामने आकर अपनी जांच कराएं

देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा घोषित लॉकडाउन अपने चरम पर है। जिसके मद्देनजर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग के निर्देश पर बीएचयू में एसएमसीसी का गठन किया गया है। इसके जरिए लॉकडाउन के दौरान छात्रों के मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य का ध्‍यान रखना और उनकी चिंताओं को दूर करना है। इस बीच वाराणसी में अब तक 77500 लोगों का स्कैनिंग हो चुका है, 20 हजार से ज्यादे लोग होम क्वारेंटाइन किया गया है।

एसएमसीसी का कोआर्डिनेटर मनोचिकित्‍सक प्रो. संजय गुप्‍ता को बनाया गया है। कोआर्डिनेटर ने बताया कि बुधवार से सेंटर चालू होने के साथ ही बड़ी संख्‍या में छात्रों के फोन और व्‍हाट्सएप पर संदेश आ रहे हैं। ज्‍यादातर छात्रों को शिक्षा से जुड़ी चिंता को लेकर नींद न आने की समस्‍या है, जो उन्हें तनाव की ओर ले जा रही है। मोबाइल पर ज्‍यादा समय तक व्यस्‍त रहना भी मानसिक बीमारी की एक बड़ी वजह है।

संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में आए लोग स्वेच्छा से अपनी जांच करांए

कोरोनावायरस से संक्रमित व्यक्ति या वह सभी व्यक्ति जो संक्रमण क्षेत्र या संक्रमित व्यक्तियों के सम्पर्क में आये हैं,या जो निजामुद्दीन दिल्ली तब्लीगी जमात सम्मेलन में शामिल हुये हों या शामिल होने वालों के सम्पर्क में आये हों व जिनको किसी भी प्रकार से संक्रमण होने की सम्भावना हो, वह स्वेच्छा से बिना देरी अथवा लापरवाही किये 24 घण्टेंके अन्दर अपनी चिकित्सीय जांच कराएं।

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के निर्देशानुसार शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे समस्त व्यक्ति जिन्हें शहरी क्षेत्र में संचालित किये जाने वाले मोबाइल वार्ड फ्लू क्लीनिक तथा ग्रामीण क्षेत्र में संचालित किये जाने वाले मोबाइल विलेज फ्लू क्लीनिक के चिकित्सकों द्वारा लक्षण के आधार पर कोरोना संक्रमण की जांच के लिए चिकित्सीय सलाह दी जा रही है।

वे तत्काल जांच हेतु अपना नमूना पं0 दीनदयाल उपाध्याय राजकीय चिकित्सालय, पाण्डेयपुर अथवा शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र शिवपुर में स्थापित नमूना संग्रह केन्द्र में अपना नमूना दें।उन्होंने कहा कि नमूने की जांच कर कोरोना संक्रमण की स्थिति का पता चल सके। उनके द्वारा ऐसा नहीं करने से उनके परिवार तथा सम्पर्क में आने वाले व्यक्तियों को भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। यदि उनके द्वारा तत्काल अपना नमूना जांच हेतु नहीं दिया जाता है तो उनके विरुद्ध आईपीसी की सुसंगत धाराओं के अन्तर्गत कठोर विधिक कार्यवाही की जायेगी।



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बनारस की गलियों में लगातार सैनिटाइजिंग की जा रही है। इस दौरान जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा के निर्देशानुसार शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र के ऐसे समस्त व्यक्ति जिन्हें शहरी क्षेत्र में संचालित किये जाने वाले मोबाइल वार्ड फ्लू क्लीनिक तथा ग्रामीण क्षेत्र में संचालित किये जाने वाले मोबाइल विलेज फ्लू क्लीनिक के चिकित्सकों द्वारा लक्षण के आधार पर कोरोना संक्रमण की जांच के लिए चिकित्सीय सलाह दी जा रही है।


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