कानपुर के बिकरू गांव में दोजुलाई की रात डीएसपी समेत आठ पुलिसकर्मियों की हत्या कर फरार हुए गैंगस्टर विकास दुबे का 'मददगार' को पकड़ने में जुटीयूपी एसटीएफ की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। एसटीएफ की पूछताछ में सामने आया है कि, मुठभेड़ से पहले बीट दरोगा केके शर्मा कोशाम चार बजे विकास ने फोन किया था और धमकी दी थी कि थानेदार (विनय तिवारी) को समझा लो, अगर बात बढ़ी तो बिकरू गांव से कई लाशें उठेंगी। इसके अलावा सिपाही राजीव चौधरी रात में उसी दिन विकास से बात हुई थी। बता दें दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया जा चुका है।उधर, जिस पर दुर्दांत अपराधी पर 60 मुकदमे दर्ज थे, वह थाने की टॉप-10 लिस्ट में शामिल नहीं था, उसे अब प्रदेश के टॉप थ्री अपराधियों में रखा गया है।
बद्दो और आशुतोष के बाद तीसरा मोस्ट वांटेड विकास दुबे बना
डीएसपी, तीन दरोगा और चार सिपाहियों की हत्या करने के बाद विकास दुबे को प्रदेश का तीसरा सबसे बड़ा मोस्ट वांटेड घोषित किया गया है। अभी तक उस पर लूट, हत्या, एनडीपीएस, रासुका जैसी संगीन धाराओं में 60 केस दर्ज होने के बाद भी थाने के टॉप-10 अपराधियों में शामिल नहीं था। वर्तमान में विकास दुबे पर ढाई लाख का इनाम है। विकास दुबे के अलावा प्रदेश के दो ऐसे अपराधी हैं जिनका नाम ढाई-ढाई लाख की लिस्ट में शामिल है, इनमें से एक है मेरठ का मोस्ट वांटेड बदन सिंह बद्दो और दूसरा पश्चिमी यूपी का आशुतोष शामिल है। चर्चा है कि, सोमवार को विकास दुबे पश्चिमी यूपी के बिजनौर में अपने छह साथियों के साथ देखा गया। आशंका है कि, वह उत्तराखंड फरार हो सकता है। उत्तराखंड पुलिस को भी अलर्ट कर दिया गया है।
पुलिस रहती थी नतमस्तक, विवाद सुलझाने से पहले लेनी होती थी विकास की इजाजत
एसटीएफ की जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है, विकास दुबे के मददगारों की लिस्ट बढ़ती जा रही है। चौबेपुर, बिल्हौर, ककवन, शिवराजपुर थाने के 200 से अधिक पुलिसकर्मियों को रडार पर लिया गया है। इन सभी के मोबाइल फोन सर्विलांस पर हैं और सीडीआर खंगाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि, पुलिसकर्मी विकास दुबे के आगे नतमस्तक रहते थे। उसके लिए गुर्गे की तरह काम करते थे। विकास दुबे का पुलिस वालों में इतना खौफ था कि, बीट दारोगा ने थानेदार कोसूचना देकर बिकरू गांव की बीट से हटाए जाने की बात कही थी। दारोगा ने कहा कि, वह सहम गया था। मुठभेड़ टीम में भी दरोगा शामिल नहीं हुआ था। शिवली रोड के कई गांवों में विवाद की जांच के लिए पुलिस को विकास दूबे से अनुमति लेनी होती थी। तहरीर मिलने के बाद बीट दरोगा और सिपाही विकास को जानकारी देते थे। विकास की अनुमति के बाद ही पुलिस जाती थी। अधिकतर मामले विकास अपने घर पर ही बुलाकर हल करा देता था।
बिकरूकांड की मजिस्ट्रेट ने शुरू की जांच
कानपुर के बिकरूगांव में हुए मुठभेड़ कीमजिस्ट्रेट्र जांच चौथे दिन शुरू कर दी गईहै। एडीएम नेएफआईआर कॉपी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, बयानों की कॉपी मांगी है।बिकरू गांव में क्या-क्या हुआ? किसने क्या क्या किया? इसको लेकर मजिस्ट्रेट ने जांच अपनी शुरू की है।मौके के परीक्षण के साथ ही जेसीबी चालक और बिजली काटे जाने के बिंदुओं की भीजांच की जाएगी। एडीएम भू/राजश्व प्रमोद शंकर शुक्ला को जांच मजिस्ट्रेट बनाया गया है।
विकास दुबे और उसके भाई के खिलाफऔर दर्ज हो सकते हैं और मुकदमें
चार दिन बाद पुलिस और एसटीएफकी जांच केबाद विकास और उसके भाई पर कुछ और मुकदमें दर्ज हो सकते हैं। पुलिस बीते 22 साल से अपराध में अपना सिक्का चलाने वाले विकास दुबे की गुंडई/वसूली और मारपीट का मुकदमा न दर्ज कराने वालों के मुकदमें दर्ज कर सकती हैं। विकास दुबे के रहते हुए कोई भी उसके आतंक के आगे नहीं खड़ा सकता था। जो लोग विकास के खौफसे अबतक हिम्मत नहीं जुटा पाए अब सामने आ रहे हैं। वहीं सचिवालय की नीलामी में मिली कार धमकाकर लेनें के मामले मे हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे और उसके छोटे भाई दीप प्रकाश का गैर जमानती वारंट पुलिस लेगी। औपचारिकताएंपूरी कर ली गई है। गैर जमानती वारंट मिलने के बाद ही पुलिस लखनऊ में विकास की संपत्ति को कुर्क करने की आसानी से अनुमति ले सकेगी।
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