कानपुर के बिकरू गांव में गैंगस्टर विकास दुबे और पुलिस के बीच मुठभेड़ हुए चार दिन बीत चुके हैं। बीते गुरुवार को पुलिस टीम विकास दुबे को पकड़ने गई थी, तभी बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर डीएसपी बिल्हौर देवेंद्र मिश्र और सात अन्य पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी। गैंगस्टर विकास दुबे वारदात के बाद से फरार है। उस पर अब तक ढाई लाख का इनाम घोषित किया जा चुका है। यूपी एसटीएफ व कानपुर मंडल की 40 टीमें उसकीतलाश में लगी हैं। लेकिन कोई सुराग हाथ नहीं लगा है। उधर, जिस बिकरू गांव में खूनी खेल खेला गया, वहां अभी हालात सामान्य नहीं हुए हैं। डर और आशंकाओं के बीच गांव की गलियां सूनी हैं। कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।
बीते शनिवार को प्रशासन ने बंकर बनाए जाने और असलहे छिपाकर रखे जाने की आशंका के तहत विकास दुबे के घर को ढहा दिया था, उसका मलबा अभी जस का तस पड़ा है। 150 पुलिसकर्मी गांव के चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद हैं। एक रिपोर्ट-
गैंगस्टर के आसपास घरों के लोग फरार, महिलाएं घरों में कैद
जिला मुख्यालय से 39 किमी की दूरी पर बिकरू गांव है।गांव की मुख्य सड़क से उतरकर जैसे ही गैंगस्टर विकास दुबे की घर की तरफ चलना शुरू करिए तोवहीं से पुलिस की भारी भीड़ दिखाई देने लगती है। विकास के घर की ओर जाने वाली सड़क के मुहाने पर 'माननीय विकास दुबे' के नाम का पत्थर लगा हुआ है। उस सड़क पर जाते ही पुलिसकर्मी सबसे पहले जाने वाले के बारे में पूछताछ करते हैं। तभी आगे जाने देते हैं। हालांकि यह पुलिस वाले अलग अलग थानों के हैं,जिनकी ड्यूटी लगाई गई है। आगे चलने पर सड़क के दोनों किनारों पर बने घरों में सन्नाटा सा दिखता है। विकास के घर से 200 मीटर बने नल पर कुछ बुजुर्ग महिलाएं जरूर मिलीं, लेकिन उन्होंने कोई भी बात करने से इनकार कर दिया। बस यही बोला कि, करीब 20 घरोंके मर्द डर के मारे फरार हैं। घर में केवल औरतें ही हैं। यह कहते हुए हड़बड़ाहट में बुजुर्ग महिला घर की ओर बढ़ गयी। आगे जाने पर विकास के घर के अगले बगल जिन घरों से पुलिस टीम पर हमला किया गया था। वह सभी घर बन्द मिले।
जिस घर में डीएसपी की हत्या हुई वह भी पड़ा है बन्द
विकास के घर के ठीक सामने उसके मामा प्रेम कुमार पांडेय का घर है। प्रेम प्रकाश को शुक्रवार सुबह पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया था। प्रेम के घर में ही डीएसपी देवेंद्र मिश्र की हत्या की गई थी। अब यह घर वीरान पड़ा है। परिवारकानपुर चला गयाहै। जबकि बेटा शशिकांत अभी भी फरार है। हालांकि विकास के घर के सामने पुलिसवालों का जमावाड़ा लगा हुआ है, लेकिन ग्रामीण कोई नजर नहीं आया।
विकास के घर के पीछे है चहल-पहल
वहीं विकास के घर के पीछे बने हुए घरों में चहल पहल जरूर दिखी। जहां महिलाएं गाय गोबर हटाने का काम करती दिखीं। पुरुष और युवाघर के बाहर चहलकदमी करते दिखाई दिए। हालांकि कोई भी बात करने को राजी नहीं था। दरवाजे पर बैठे एक बुजुर्ग को जब घटना वाली रात के बारें में जानने के लिए कुरेदा गया तो वे बोले कि, हमेंकुछ नहीं पता चला। जब सुबह पुलिस आई है तभी पता चला है।
खेल के मैदान में भी पसरा है सन्नाटा
गांव के बाहर ही एक बड़ा सा मैदान है। यहां बच्चे दिन भर कुछ न कुछ खेला करते हैं। लेकिन आज यहां सन्नाटा पड़ा हुआ है। मैदान में पुलिस की गाड़ियां खड़ी हुई हैं। जबकि बच्चे घरों में दुबके हुए हैं। गांव की मुख्य सड़क के दूसरी ओर तालाब के किनारे कुछ घर बने हुए हैं। वहां से भी मर्दों को पुलिस उठा ले गयी है। उन घरों की महिलाएं मीडिया वालों से ही सलाह लेती दिखीं कि हमारा घर तो विकास के घर से बहुत दूर है और हमारे घर के मर्द तो उस समय सो रहे थे तो क्या पुलिस पूछताछ के बाद इन्हें छोड़ देगी?
बिकरू गांव बना छावनी, अभी भी गांव वालों से हो रही है पूछताछ
गांव में इस समय पुलिस ही पुलिस दिखाई पड़ रही है। पुलिस इन्वेस्टिगेशन के लिए गांव के कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है और जरूरत पड़ने पर पूछताछ कर भी रही है। लेकिन उसे अभी तक ऐसा कोई सबूत नही मिला, जिससे विकास की कोई लोकेशन मिल सके।
गांव की जातीय राजनीति को हवा देकर दबदबा बनाया था विकास ने
विकास का बिकरू गांव ब्राह्मण बाहुल्य है। इन परिवारों के लिए विकास सबकी मदद करने को तत्पर रहता था। जबकि गांव में पिछड़ी जातियां भी खूब हैं। जिनकी हर दुख दर्द में विकास मदद किया करता था। जिसकी वजह से विकास का गांव में सिक्का चलता था। लेकिन गांव के ही कुछ मुस्लिम परिवारों से उसकी नहीं बनती थी। गांव के ही एक बुजुर्ग ने बताया कि अपने अहाते में ही विकास कचहरी लगाकर गांव के छोटे बड़े मामलों का निपटारा कर दिया करता था। यही नहीं ब्राह्मणों और पिछड़ी जातियों का वोटबैंक भी अपने इशारे पर वह चुनाव में प्रयोग करता था। जिसकी वजह से उसे राजनैतिक संरक्षण भी प्राप्त होता था।
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