गुरु पूर्णिमा महोत्सव के मौके पर मथुरा के गोवर्धन में रविवार को मुड़िया संतों ने 463वर्षों से चली आ रही परंपरा के अनुसार मुड़िया शोभायात्रा निकाली। लेकिन इस पर वैश्विक महामारी का असर देखने को मिला। हर साल लाखों की भीड़ को अपने में समेटने वाली इस यात्रा में अबकी चंद श्रद्धालुओं ने परंपरा का निवर्हन किया।जिसमें कुछ भक्तों ने अपने गुरुओं को मास्क भेंट किएऔरशोभायात्रा के दौरान पुष्पवर्षा की जगह सैनिटाइजर की बारिशहोती दिखाई दी। लोगों ने जगद्गुरु भगवान श्रीकृष्ण से कोरोना के खात्मे की प्रार्थना की।
मृदंग की धुन पर थिरकते नजर आए संत
ढोलक की थाप और मृदंग की धुन पर मुड़िया यात्रा गोवर्धन चकलेश्वर स्थित सनातन गोस्वामी की समाधि स्थल से शुरू हुई। मुड़िया संतों की शोभा यात्रा पूरे कस्बे में ढोल मृदंग के साथ धूमधाम के साथ निकाली गई। संत नाचते थिरकते नजर आए।हर साल की तरह इस बार भी गुरु पूर्णिमा पर मनाई गई463वीं यात्रा बदले स्वरूप में दिखाई दी। जिसमें गुर और शिष्यके बीच कुछ दूरी दिखाई दी। लेकिन आस्था पर सब पर भारी रही।
यह है मान्यता
गोवर्धन में गुरु पूर्णिमा के दिन सभी मुड़िया संत अपने सिर मुड़वा कर अपने गुरु सनातन गोस्वामी पाद की याद में पूरे कस्बे में शोभायात्रा निकालते हैं। आपको बता दें कि गौड़ीय संप्रदाय के अनुयाई सनातन गोस्वामी पाद महाराज हर रोज गोवर्धन मानसी गंगा की परिक्रमा लगाया करते थे, लेकिन जब उन्होंने भी देह त्याग किया तो उनकी याद में उनके हजारों शिष्यों ने अपने सिर मुड़वा कर पूरे कस्बे में उनके शवके साथ यात्रा निकाली। तभी से लेकर यह परंपरा निरंतर चली आ रही है और गुरु पूर्णिमा के ही दिन मुड़िया संत अपने गुरु की याद में सिर मुड़वा कर उसी परंपरा का निर्वहन करते हैं। इसलिए गोवर्धन में लगने वाले गुरु पूर्णिमा मेले को मुड़िया पूर्णिमा के तौर पर भी जाना जाता है।
मेला आयोजन को रद्द किया गया था
लेकिन इस बार कोरोनावायरस संक्रमण को देखते हुए प्रशासन ने गोवर्धन का राजकीय गुरु पूर्णिमा मेला का आयोजन रद्द कर दिया था। इस बार सभी लोगों से अपील की गई थी कि वह गोवर्धन परिक्रमा करने नआएं। जिससे संक्रमण के खतरे को टाला जा सके। इसी को देखते हुए इस बार गोवर्धन गुरु पूर्णिमा मेले में श्रद्धालुओं का आगमन नहीं हो सका। आपको बता दें कि एकादशी से पूर्णिमा तक लगने वाले गोवर्धन के गुरु पूर्णिमा मेले में 5 दिन में 1 करोड़ से अधिक श्रद्धालु परिक्रमा कर जाते हैं।यही कारण है कि गोवर्धन में निकाली गई मुड़िया संतों की शोभायात्रा में भी शिष्यों की संख्या कम रही।
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