वृंदावन के कई आश्रमों में रहने वाली निराश्रित महिलाओं (विधवा) ने अपने हाथों से 501 राखी बनाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजी है। इसके अलावा वृंदावन थीम यानी मोरपंख, कान्हा के चित्रों के साथ बने मास्क भी भेजे गए हैं। साल 2016 से वृंदावन की चार-पांच निराश्रित महिलाएं दिल्ली में प्रधानमंत्री की कलाई पर खुद अपने हाथों से राखी बांधती थीं। लेकिन, इस साल उनके अरमानों पर कोरोना ने पानी फेर दिया। उनके अनूठे प्रेम और हौसले को कोरोना नहीं डिगा सका।
पीएम के चित्र वाली बनाई राखियां
महिलाओं ने प्रधानमंत्री की फोटोयुक्त राखी बनाई है। यह राखी मां शारदा और मीरा सागरभग्नि आश्रम में रहने वाली वृद्ध विधवाओं के द्वारा तैयार की गई है। 75 साल की छवि दासी ने पिछले साल प्रधानमंत्री को राखी बांधी थी। इस बार वे भावुक हैं। उनकी भावुकता का कारण व्यक्तिगत रुप से पीएम के पास न पहुंच पाना है। वह कहती हैं कि हमारे द्वारा बनी राखी और मास्क पीएम तक पहुंचेगा। मैंने व्यक्तिगत रूप से सुरक्षित रहें और आत्म निर्भर जैसे संदेश देने वाले और मोदी जी के चेहरा ढंके हुए चेहरे वाले फोटो के साथ राखी डिजाइन किया है।
साल 2012 से विधवाओं के लिए चल रहे कई कार्यक्रम
सोशल एक्टिविस्ट और सुलभ आंदोलन के संस्थापक डॉक्टर बिंदेश्वर पाठक ने बताया कि निराश्रित माताओं के जीवन में खुशियां भरने के लिए साल 2012 से कई अनुष्ठानों का आयोजन शुरू किया गया था। उनमें से एक रक्षाबंधन का पर्व भी है। वृंदावन की हजारों विधवा महिलाओं की तरफ से चार-पांच माताएं मोदी को राखी बांधने और मिठाई देने के लिए दिल्ली जाती थीं। इस बार कोरोना ने इन्हें निराश किया है। लेकिन, राखी और मास्क दिल्ली भेजे जा चुके हैं।
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