कानपुर के बिकरू गांव में बीते गुरुवार रात हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे की गिरफ्तारी के लिए पहुंची पुलिस टीम पर बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी थी। इस दौरान डीएसपी बिल्हौर देवेंद्र मिश्र समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। वहीं, घायल एसओ बिठूर कौशलेंद्र प्रताप समेत छह पुलिसकर्मियों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। एसओ बिठूर ने घटना वाली रात असल में क्या हुआ था? किस तरह विकास दुबे व उसके गुर्गे घात लगाकर पुलिस टीम पर हमला कर रहे थे? जिससे यूपी के इतिहास की सबसे बड़ी क्षति हुई। कौशलेंद्र ने इससे पर्दा उठाया है।
चारों तरफ से हुई फायरिंग
कौशलेंद्र प्रताप ने बताया कि, जिस दिन घटना हुई थी, उस दिन एसओ चौबेपुर विनय तिवारी ने दबिश पर चलने की सूचना दी थी। हमारी टीम उस रात विकास दुबे के आवास पर छापा मारने के लिए लगभग 12:30 बजे रवाना हुई। हमने अपनी गाड़ियों को विकास के घर के पास खड़ा कर दिया और उसके घर की ओर बढ़ने लगे। लेकिन वहां एक जेसीबी पहले से रोड पर खड़ी थी। हम एक-एक करके जेसीबी के चारों ओर घूमते हुए और घर के करीब चले गए। तभी अचानक हम पर फायरिंग शुरू हो गई। फायरिंग चारों तरफ से छतों से हो रही थी, हम टारगेट को नहीं देख पा रहे थे। लेकिन बदमाश हमारी मूवमेंट को साफ देख रहे थे।
हमारी टीम शांत बैठ गई थी
हमें इसका मुठभेड़ जैसी स्थिति का अनुमान नहीं था। हमनें खुद को सुरक्षित करने के बाद पोजिशन लेकर फायरिंग की। उन्होंने बताया कि, पहले ही राउंड में ज्यादातर पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। बड़ी मुश्किल से मैंने अपने दो साथी अजय सिंह और अजय कश्यप को बचाया। इन दोनों को गोली लग गई थी। इसलिए मैंने पहले इन्हे बचाना ज्यादा जरूरी समझा। हमारी टीम शांत बैठ गई थी। यही वजह है कि, इतनी ज्यादा कैजुअल्टी हुई।
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