उत्तर प्रदेश में कानपुर देहात के बिकरू गांव में हिस्ट्रीशीटर को पकड़ने गई पुलिस टीम पर बदमाशों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। जिसमें सीओ समेत आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए। इस घटना के बाद से पुलिस महकमे में शोक का माहौल है। किसी ने अपने पिता की खाकी वर्दी को देखकर इस महकमे में अपने कदम रखे थे तो किसी ने सिपाही के बाद परीक्षा देकर अपने कंधों पर स्टार सजाए थे। वहीं, किसी परिवार का इकलौता सहारा छिन गया। शहादत की खबर से मृतकों के परिवार में मातम है। कानपुर मुठभेड़ में जिन पुलिसकर्मियों को मिली वीरगति, उनकी कहानी...
9 माह बाद रिटायर होने वाले थे सीओ देवेंद्र मिश्र
मूल रूप से बांदा के महेबा गांव के रहे वाले सीओ बिल्हौर देवेंद्र कुमार मिश्र ऑपरेशन के दौरान टीम का नेतृत्व कर रहे थे, लेकिन बदमाशों की गोली का शिकार हो गए। वे मार्च 2021 में ही रिटायर होने वाले थे। परिवार में पत्नी आस्था और दो बेटियां वैष्णवी और वैशारदी हैं। वैष्णवी मेडिकल की तैयारी कर रही है, जबकि वैशारदी अभी इंटरमीडिएट की छात्रा है। देवेंद्र का एक भाई डाकघर में तो दूसरे भाई आरडी मिश्र महेबा गांव के पूर्व प्रधान हैं। साल 1980 में उन्हें दरोगा के पद पर तैनाती मिली थी। साल 2007 में प्रोन्नत होकर इंस्पेक्टर बने और 2016 में गाजियाबाद के मोदीनगर में बतौर क्षेत्राधिकारी तैनाती मिली थी। उनका परिवार स्वरूपनगर में पॉमकोट अपार्टमेंट रह रहा है। मौत की खबर परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल है।
आधी रात बेटे को मिली मुठभेड़ की खबर
मुठभेड़ में शिवराजपुर थाना प्रभारी महेश यादव भी शहीद हुए हैं। वे रायबरेली जिले के सरेनी थाना क्षेत्र के हिलौली गांव के रहने वाले थे। परिवार में पत्नी सुमन, 20 साल का बेटा विवेक उर्फ सम्राट व डेढ़ साल का बेटा विराट है। सभी थाने के सरकारी आवास में रहते थे। बड़ा बेटा विवेक मेडिकल की तैयारी कर रहा है। उसने बताया कि, पिता रोज की तरह रात 9 बजे खाना खाने के लिए घर आए थे। एक घंटे बाद चले गए। हर दिन वे रात दो बजे तक वापस आ जाते थे। लेकिन जब देर हुई तो मैंने रात तीन बजे उन्हें फोन किया तो किसी और रिसीव किया। बताया कि, मुठभेड़ चल रही और फोन काट दिया। इसके बाद सुबह शहादत की खबर मिली। शहीद दरोगा महेश यादव के पिता देव नारायण जलकल विभाग में पंप आपरेटर थे। महेश कुमार यादव (45) वर्ष 1996 में सहारनपुर से पुलिस में भर्ती हुए थे। वर्ष 2014 में दरोगा की परीक्षा में पास हुए तो पहली तैनाती में एसएसपी कानपुर के पीआरओ की जिम्मेदारी मिली थी। बीते 2 वर्ष से महेश कुमार शिवराजपुर थाने में तैनात थे।

तेज तर्रार पुलिसवालों में गिनती थी अनूप की
चौकी प्रभारी मंधना अनूप कुमार कानपुर जिले में तेज तर्रार पुलिसवालों में गिने जाते थे। वे प्रतापगढ़ जिले के मानधाता थाना क्षेत्र के बेलखरी गांव के रहने वाले थे। पिता का नाम रमेश बहादुर सिंह है। साल 1986 में जन्मे अनूप ने साल 2015 में पुलिस विभाग जॉइन किया था। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद छह फरवरी 2019 को उनकी तैनाती कानपुर के बिठूर थाने की टिकरा चौकी में हुई थी। इसके बाद जनवरी 2020 में उनका तबादला मंधना चौकी प्रभारी के तौर पर हुआ था। परिवार में पत्नी नीतू, 9 साल की बेटी गौरी, तीन साल का बेटा सूर्यांश है, जो प्रयागराज में रहते हैं। मौत की खबर पाकर पूरा परिवार कानपुर रवाना हो गया है।
चार भाईयों में बड़े थे एसआई नेबूलाल
एसआई नेबुलाल प्रयागराज के हंडिया के रहने वाले थे। कानपुर में बलिदान देने वाले दारोगा नेबू लाल हंडिया के मीति नऊआन गांव के रहने वाले थे। शहादत की खबर पाकर पूरा परिवार कानपुर पहुंच गया है। वे एक माह पहले छुट्टी लेकर अपने घर गए थे। चार भाईयों में वे सबसे बड़े थे। एक भाई ओम प्रकाश वाराणसी जिले में तैनात हैं। एक भाई होमगार्ड और चौथा भाई गांव में रहकर खेतीबाड़ी संभालते हैं।
ननिहाल में रहकर की थी पढ़ाई, बचपन में हो गया था मां का निधन
मूलत: झांसी में मऊरानीपुर के मोहल्ला चौक दमेला निवासी सिपाही सुल्तान सिंह भी बदमाशों से लोहा लेते हुए शहीद हुए हैं। सुबह जब परिवार वालों को शहादत की खबर मिली तो लोगों पर गमों का पहाड़ टूट पड़ा है। वह मूलत: बूढ़ा भोजला गांव का रहने वाला था। सुल्तान की मां का बचपन में ही निधन हो गया था। इसलिए उनकी शुरुआती शिक्षा ननिहाल में हुई। यहीं से पुलिस महकमे में नौकरी हासिल की थी। सुल्तान की सात साल की बेटी है। जिसे वह डॉक्टर बनाना चाहता था। लेकिन अब पूरा परिवार उसके भविष्य को चिंतित है।
खाकी को देखते हुए बीता था बचपन
कुख्यात बदमाश विकास दुबे के साथ हुई मुठेभड़ में गाजियाबाद में मोदीनगर के देवेंद्रपुरी कॉलोनी निवासी सिपाही राहुल भी शहीद हो गए।शहादत की खबर पाकर परिवार में कोहराम मचा हुआ है। परिजनों बताया कि पिछले साल ही राहुल की दिल्ली निवासी दिव्या से शादी हुई थी व उनकी एक मासूम बच्ची है।राहुल के पिता ओमकुमार यूपी पुलिस में सब इंस्पेक्टर थे। वह अब रिटायर होने के बाद परिवार सहित मोदीनगर की देवेंद्रपुरी कॉलोनी में निवास करते हैं। उनके तीन पुत्रों में से मंझला पुत्र राहुल था। सुबह सूचना मिलने के बाद राहुल का शव लेने के लिए उनके पिता सहित परिवार कानपुर के लिए रवाना हो गया है।
घर वाले शादी का संजो रहे थे सपना
आगरा जिले में फतेहाबाद के ग्राम पोखर पांडे निवासी सिपाही बबलू कुमार साल 2018 में भर्ती हुए थे। वे अभी अविवाहित थे। घर वाले अब उसकी शादी के सपने संजो रहे थे। कुछ परिवारों से शादी की बात भी चल रही थी। लेकिन बबलू कुमार की शहादत ने परिवार के सभी सपने चकनाचूर कर दिए हैं। पुलिस ट्रेनिंग के बाद कानपुर में सिपाही पद पर तैनाती मिली थी और जनवरी 2019 को बिठूर थाने में आमद कराई थी।
10 दिन पहले छुट्टी से लौटा था सिपाही जितेंद्र
कानपुर मुठभेड़ में शहीद हुए मथुरा के रहने वाले सिपाही जितेंद्र 23 जून को छुट्टी काटकर नौकरी पर लौटे थे। वे मूलरुप से थाना रिफायनरी इलाके के गांव बरारी के रहने वाले थे। लेकिन हाल ही में परिवार इंदिरा विाकस कॉलोनी में शिफ्ट हुआ था। भाई सौरभ ने बताया कि, वे सुबह सो रहे थे, तभी फोन आया कि जितेंद्र को गोली लगी है। इसके बाद फोन कट गया था। लेकिन बात में शहीद होने की जानकारी हुई। जितेंद्र की शहादत के बाद उसके दोस्त भी दुखी हैं। दोस्त राम गोपाल ने बताया कि, जितेंद्र पढ़ाई में तेज था और वह अधिकारी बनना चाहता था। परिवार में रोजी रोटी का अकेला सहारा था। उस पर दो भाई और 1 बहन की जिम्मेदारी थी। जितेंद्र के साथ रहे दोस्त उसके साथ बिताए पलों को याद कर सिहर हो उठते हैं।वह बहुत सुंदर और बहुत प्रेम व्यवहार रखने वाला इंसान था।
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