वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के कारण बीते पांच माह से बंद स्कूलों को सितंबर माह से खोले जाने की चर्चा है। लेकिन इस बीच उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले से एक हैरान करने वाली खबर सामने आई है। यहां नोएडा पॉवर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएस) ने 145 प्राथमिक व जूनियर स्कूलों की बिजली काट दी है। वहीं, 19 स्कूलों के मीटर तक उखाड़ दिए गए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग के अनुसार, साल 2018 से अब तक का करीब 5 करोड़ रुपए बिजली बिल बकाया है। अब बिल कौन जमा करेगा, इस बात काे लेकर खींचतान जारी है। लेकिन इसका खामियाजा शिक्षकों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूल खुलेंगे तो बच्चों को भी गर्मी से परेशान होना पड़ेगा।
हाथ से पंखा झलते नजर आए शिक्षक
बता दें कि कोरोना संकट काल में बेसिक शिक्षा विभाग ने अभी बच्चों के स्कूल आने पर रोक लगा रखी है। लेकिन शिक्षक बीते एक जुलाई से विद्यालय पहुंच रहे हैं। दैनिक भास्कर ने ग्रेटर नोएडा के तुगलपुर प्राथमिक विद्यालय का जायजा लेकर हकीकत जानने की कोशिश की। यहां शिक्षक व शिक्षिकाएं अपने एक हाथ से पंखा झलते नजर आए तो दूसरे हाथ से विभागीय काम निपटा रहे थे। इस विद्यालय में बिजली दो साल से कटी हुई है। यहां पंखे लगे हुए हैं। लेकिन बिजली कनेक्शन कट जाने से ठप पड़े हैं।
बीएसए ने कहा- बिजली बिल अथॉरिटी को जमा करना है
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी धीरेंद्र कुमार ने बताया की शासन को कई बार उनके द्वारा पत्र लिखा गया है। लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। दरअसल स्कूलों के ग्राम पंचायत व नगर पंचायत के अंडर किया गया था। बिजली बिल जमा करते हैं। लेकिन यहां पर ग्राम पंचायत नहीं है यहां अथॉरिटी है तो बिल उसको जमा करना होगा। लेकिन इसके लिए शासन से आदेश आएगा। शासन को इस विषय पर अवगत करा चुके हैं। पत्राचार भी कर चुके हैं। जल्द समस्या का समाधान होगा।
एनपीसीएल का कोई अधिकारी बोलने को तैयार नहीं
इस प्रकरण में एनपीसीएल का कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। कई बार एनपीसीएल के वायस प्रेसिडेंट सारनाथ गांगुली से सम्पर्क साधा गया, लेकिन वो इस मुद्दे पर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
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