उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ राहत शिविरों के आसपास की झाड़ियों की सफाई के साथ रात के समय पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। कटान से प्रभावित भूमि के पास स्थित स्कूल और पंचायत भवनों को शिविर नहीं बनाने को कहा है, ऐसे शिविर सुरक्षित नहीं होंगे। राहत की खबर यह है कि वर्तमान में प्रदेश के सभी तटबंध सुरक्षित हैं। किसी भी तटबंध को लेकर कोई चिंता करने जैसी बात नहीं है।
राहत आयुक्त संजय गोयल ने बताया है कि जलभराव वाले क्षेत्रों से गुजरने वाले बिजली के तारों और खंभों को दुरुस्त रखने के साथ ही करंट से कोई जनहानि या पशुहानि ना होने पाए इसके लिए निर्देश दिए गए हैं। राज्य के बाढ़ प्रभावित जिलों में सर्च और रेस्क्यू के लिए एनडीआरएफ की 15 तथा एसडीआरएफ और पीएसी की सात कुल 22 टीमें लगाई गई हैं।
अब तक 779 नावें प्रभावित क्षेत्रों में लगा दी गई हैं। पीड़ित परिवारों को राहत किट का वितरण कराया जा रहा है। किट में 17 प्रकार की सामग्री रखी गई है। प्रभावित क्षेत्रों में 265 मेडिकल टीमें भी लगाई गई हैं। प्रदेश में अब तक 310 बाढ़ शरणालय तथा 735 बाढ़ चौकियां स्थापित की जा चुकी हैं। शारदा नदी पलिया कला (लखीमपुर खीरी), सरयू (घाघरा) नदी तुर्तीपार (बलिया), एल्गिनब्रिज (बाराबंकी) तथा अयोध्या में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
15 जिले हैं बाढ़ से प्रभावित
अंबेडकरनगर, अयोध्या, आजमगढ़, बहराइच, बलिया, बाराबंकी, बस्ती, गोंडा, गोरखपुर, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, मऊ, देवरिया, संतकबीर नगर और सीतापुर के 674 गांव इस समय बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ या अन्य आपदा से संबंधित किसी भी समस्या पर लोग राज्य स्तरीय हेल्पलाइन नंबर 1070 पर संपर्क कर सकते हैं।
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