पूर्वांचल के मऊ जिले में कोपागंज के रहने वाले बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी गिरोह के शॉर्प शूटर राकेश उर्फ हनुमान पांडेय (43 साल) को रविवार तड़के राजधानी लखनऊ में यूपी एसटीएफ ने मुठभेड़ के बाद मार गिराया। उस पर एक लाख का इनाम घोषित था। राकेश ने 16 साल की उम्र में अपने सहपाठी की हत्या की थी।
बात साल 1993 की है। इंजीनियरिंग करने के लिए उसने लखनऊ में पॉलीटेक्निक करने के बाद गवर्नमेंट कॉलेज में दाखिला लिया था। लेकिन पहले ही साल हॉस्टल में कुछ लड़कों से विवाद हुआ। विवाद के दौरान राकेश ने एक लड़के को उठाकर पटक दिया। जिससे उसकी मौत हो गई। फिर जेल में बदमाशों के संपर्क में आने के बाद उसे कॉन्ट्रैक्ट किलिंग शुरू की थी। हत्या का दूसरा मामला 2000 में रायबरेली के नगर कोतवाली में दर्ज हुआ था। इसके बाद राकेश पांडेय मऊ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी के संपर्क में आया था।
भाजपा विधायक हत्याकांड के बाद अंसारी गैंग में बना खास
गाजीपुर के मोहम्मदाबाद से भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय की 29 नवंबर 2005 में हत्या कर दी गई थी। एके-47 से लैस आधा दर्जन बदमाशों ने विधायक के काफिले को घेरकर करीब 400 राउंड से भी अधिक गोलियां बरसाई थीं। इसमें भाजपा विधायक कृष्णानंद सहित सात लोगों की मौत हो गई थी। सीबीआई ने इस मामले में मुख्तार अंसारी को मुख्य साजिशकर्ता माना था। पोस्टमॉर्टम में राय के शरीर में 21 गोलियां पाई गई थीं। इसके बाद से राकेश सिर्फ मुख्तार अंसारी के लिए काम करने लगा और पूर्वांचल के ठेकेदारी में शामिल हो गया।
लेकिन अक्टूबर 2019 में भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में विशेष सीबीआई अदालत ने विधायक मुख्तार अंसारी तथा उसके सांसद भाई अफजाल अंसारी समेत सभी आरोपियों को बरी कर दिया। 2005 में हुए इस हत्याकांड में मुख्तार अंसारी और भाई अफजाल अंसारी समेत संजीव माहेश्वरी, हनुमान पाण्डेय उर्फ राकेश, एजाजुल हक, रामू मल्लाह और मुन्ना बजरंगी को आरोपी बनाया गया था।
ठेकेदार हत्याकांड में भी बरी हो गया
मऊ जिले के ठेकेदार मन्ना सिंह व इनके साथी राजेश राय की 29 अगस्त, 2009 को कोतवाली शहर के नरई बांध के पास यूनियन बैंक के पास बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। मामले में हरेंद्र सिंह की तहरीर पर पुलिस ने मुख्तार सहित 11 लोगों पर केस दर्ज किया था। आठ साल तक चली सुनवाई के दौरान 22 गवाहों में से 17 गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने राकेश पांडेय समेत 9 लोगों को बरी कर दिया था।
एक महीने पहले राकेश व पत्नी का शस्त्र हुआ था जब्त
9 जुलाई को मऊ में एक जांच में सामने आया था कि राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पांडेय की पत्नी सरोजलता पांडेय ने तथ्यों को छुपाकर डीबीबीएल गन का लाइसेंस 2005 में ले लिया था। उसने अनुचित लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से अपने पति राकेश पांडेय उर्फ हनुमान पाण्डेय के विरुद्ध दर्ज अभियोगों को छुपाया था। इस संबंध में अभियुक्त सरोजलता पांडेय के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। साथ ही शस्त्र जब्त कर निरस्तीकरण के लिए रिपोर्ट भेजी गई थी।
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/33I4G5Z
via IFTTT

0 Comments