देश और दुनिया में फैली महामारी कोविड 19 का असर मथुरा जिले में भी दिखाई देर हा है। वृंदावन में स्थित इस्कान मंदिर में मंगलवार को 22 लोग एक साथ पॉजिटिव पाए गए, इसके बाद मंदिर परिसर को पूरी तरह से सील कर दिया गया। उत्तर प्रदेश के मथुरा में ब्रज के लाड़ले कान्हा के जन्मोत्सव को महज एक दिन बचा है। वहीं, कोरोनावायरस के डर से ब्रजभूमि में सन्नाटा पसरा हुआ है। मन्दिर एवं देवालयों में बिना भक्तों के ही कान्हा के जन्मोत्सव की तैयारियां भी चल रही हैं।
जन्माष्टमी को लेकर बाजारों में नहीं दिख रही रौनक
मन्दिर देवालयों के मुख्यद्वार विगत करीब 5 माह से दर्शनार्थियों के लिए बन्द है। सरकार ने देश भर के कृष्ण भक्तों से ब्रजभूमि में न आने की एडवाइजरी जारी कर दी है। कान्हा की लीलास्थली ब्रज में जहां कई दिनों पहले से ही कान्हा के जन्मोत्सव का उल्लास छा जाता था। इस वर्ष सन्नाटा पसरा है। बाजारों से रौनक गायब है।
ब्रज की गलियां सूनी पड़ीं
कुंज गलियां सूनी पड़ीं हैं। न प्रसाद के लिए मिठाइयों के बनने की तैयारी है। न दुकानों पर सजी रंगबिरंगी पोशाक की चमक, अनुमानित आंकड़ों के अनुसार ब्रज के लिए आर्थिक रीढ़ कहे जाने वाले पोशाक श्रंगार उद्योग को करीब जन्माष्टमी पर्व पर 80 से 100 करोड़ रुपये का घाटा उठाना पड़ रहा है।
ऑनलाइन व्यापार की कुछ कोशिशें की गईं लेकिन ट्रांसपोर्ट की कमी के कारण माल की डिलीवरी नही हो पाई। कुछ ऐसा ही हाल पोशाक कारीगरों का है। ज्यादातर कारखानों पर ताले लग चुके है। जन्माष्टमी के कुछ दिन शेष रह जाने पर हल्के फुल्के आर्डर आने पर काम की उम्मीद जगी। जबकि हर साल करीब 3- 4महीने पहले से ही देश विदेश से आर्डर की भरमार हो जाती थी। सुबह शाम की शिफ्ट में ओवरटाइम कर ऑर्डर पूरे हो पाते थे।
प्रमुख मंदिरों की तरफ से नहीं मिले पोशाक के आर्डर
एक पोशाक कारोबारी ने बताया कि उनके पास देश के कई प्रमुख मंदिरों की पोशाक के ऑर्डर आते थे। लेकिन इस बार ऑर्डर न के बराबर है। अब तो दीपावली पर ही बाजार में रौनक आने की उम्मीद है। सैकड़ों मिष्ठान व माखन मिश्री प्रसाद विक्रेताओं का है। बाहर से आने वाले लाखों श्रद्धालु प्रसाद अपने घर ले जाते थे। लेकिन इस वर्ष कोरोना ने सब कुछ तबाह कर दिया।
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