भदोही में ज्ञानपुर से बाहुबली विधायक विजय मिश्र अपने रिश्तेदार की संपत्ति हड़पने के आरोप में गिरफ्तार हो चुके हैं। उससे पहले उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए ब्राह्मण कार्ड भी खेला, लेकिन इसके बावजूद पुलिसिया कार्रवाई से बच नहीं पाए हैं। फिलहाल विजय मिश्रा प्रयागराज के नैनी जेल में हैं। ऐसे में हम आपको बता रहे हैं कि कैसे सियासी रसूख बढ़ने के साथ साथ विजय मिश्रा की संपत्ति बढ़ी, साथ ही मुकदमे भी बढ़ते चले गए।
हर 5 साल में बढ़ी 1 करोड़ की संपत्ति
विधायक विजय मिश्रा ने 2002 से चुनाव लड़ना शुरू किया था। पिछले 4 बार से वह ज्ञानपुर से विधायक हैं। हालांकि 2002 का चुनावी हलफनामा न मिल पाने के कारण हम आपको 2007 से 2017 के चुनावी हलफनामों के बारे में बता रहे हैं। 2007 में विजय मिश्रा ने एपीआई संपत्ति 6,69,42,347 करोड़ बताई है। जबकि 2012 में 7,38,74,576 बताई। वहीं 2017 में 8,05,19,726 करोड़ की संपत्ति चुनावी हलफनामे में बताई है।
10 साल में 5 गुना रफ्तार से बढ़े गंभीर केस
बाहुबली विधायक विजय मिश्रा का ज्यों ज्यों राजनीतिक रसूख बढ़ता गया, वैसे वैसे उनके ऊपर मुकदमों की संख्या भी बढ़ती गयी। बताया जाता है है कि अब तक उनके ऊपर 73 मुकदमे दर्ज हो चुके हैं। हालांकि लगभग 60 मामलों में वह बरी भी हो गए हैं। लेकिन चुनावी हलफनामों में 10 साल में विजय मिश्रा पर 5 गुना रफ्तार से मुकदमों की संख्या बढ़ी है। 2007 में विजय मिश्रा के ऊपर गंभीर मामलों की संख्या 4 थी जबकि 2012 में गंभीर मामले बढ़कर 9 तक पहुंच गए। वहीं 2017 में 22 पहुंच गए थे।
कौन हैं बाहुबली विधायक विजय मिश्रा?
पूर्व मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी के निर्देश पर राजनीति में आए विजय मिश्रा मुलायम सिंह यादव के काफी करीब रहे। ब्लॉक की राजनीति करते करते मुलायम ने सपा से 2002 में ज्ञानपुर से विजय मिश्रा को टिकट दिया तो वह जीतकर सदन पहुंच गए। फिर सिलसिला चल पड़ा और 2012 तक वह सपा के टिकट पर ही लड़े। 2017 में अखिलेश यादव ने उनका टिकट काट दिया तो निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल से चुनाव लड़ फिर विधानसभा पहुंचे। राज्यसभा चुनावों तक उन्होंने भाजपा का सपोर्ट भी किया, लेकिन अचानक ही विजय मिश्रा के सुर बदल गए और सीएम योगी आदित्यनाथ पर कई आरोप लगाए। जिसके बाद नाटकीय ढंग से उनकी गिरफ्तारी हो गयी।
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