कानपुर में बीते 22 जून को बर्रा के रहने वाले लैब टेक्नीशियन संजीत यादव अपहरण और हत्या मामले में पीड़ित परिवार की आस टूटने लगी है। संजीत की मौत का पुलिस ने खुलासा किया था लेकिन उसका शव आज तक नहीं मिला है। अब परिजनों को उसका शव मिलने की उम्मीद भी खत्म होती जा रही है। 56 दिन बीतने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं और परिवार की सहनशीलता भी जवाब देने लगी है। पीड़ित परिवार वालों ने पूरे घटनाक्रम के लिए पुलिस को ही दोषी बताया और कहा कि आज भी पुलिस सिर्फ और सिर्फ कार्रवाई के नाम पर दिखावा कर रही है।
क्या बोली संजीत की बहन?
संजीत की बहन रुचि ने कहा कि, शुरू से लेकर सिर्फ और सिर्फ पुलिस ने लापरवाही की है। 22 जून को जब भाई घर नहीं लौटा तब पुलिस को जानकारी दी। लेकिन पुलिस ने कायदे से भाई की तलाश नहीं की। हर उस चौखट पर हम गए, जहां से न्याय मिलने की उम्मीद थी। लेकिन खबर मिली कि अब संजीत इस दुनिया में नहीं है। लेकिन यकीन कैसे कर लूं, पुलिस आज तक मेरे भाई का शव ढूंढ नहीं सकी है। मैंने उस समय कहा था कि जिंदा तो मेरे भाई को नहीं ला सके, कम से कम शव को ही ला दो। आखरी बार इस रक्षाबंधन को राखी तो बांध लूं। वह भी नहीं हो सका और रक्षाबंधन को गए 11 दिन बीत गए हैं। लेकिन आज भी पुलिस के हाथ खाली हैं।
रुचि ने बताया कि हम लोगों का इंतजार अब जवाब देने लगा है। जिसको लेकर शुक्रवार को हम सभी लोग पैदल लखनऊ के लिए निकले थे। हमारा मकसद किसी भी प्रकार से कोई गलत कदम उठाना नहीं है। सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री से मिलकर पुलिस की सच्चाई बताना चाहते थे पर वह भी नहीं इन पुलिस वालों ने करने दिया और ऊपर से हम लोगों पर वर्दी फाड़ने के आरोप तक लगा डाले। जबकि इन लोगों ने ही छीना झपटी शुरू की थी। जिसमें मेरे भाई की फोटो तक टूट गई। रुचि ने कहा कि एसीएम प्रथम ने आश्वासन दिया है कि 2 या 3 दिन में मुख्यमंत्री जी से मुलाकात कर आएंगे। लेकिन अब हमें इन लोगों पर भरोसा नहीं रहा है। क्योंकि जब हम लोगों ने सीबीआई की मांग को लेकर धरना किया था तो कहा गया था कि 2 दिनों में सीबीआई जांच शुरू हो जाएगी। आज हफ्ते भर से ऊपर हो गया है। सीबीआई जांच का कोई अता पता नहीं है। सिर्फ और सिर्फ पुलिस ही लीपापोती कर रही है। रुचि ने कहा अब कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है और पुलिस पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं है।
22 जून को हुआ था संजीत का अपहरण
लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का 22 जून को अपहरण हुआ था। 29 जून को उसके परिवार वालों के पास फिरौती के लिए फोन आया। 30 लाख रुपए फिरौती मांगी गई की थी। परिवार वालों ने पुलिस की मौजूदगी में 30 लाख की फिरौती दी थी। लेकिन न तो पुलिस अपहरणकर्ताओं को पकड़ पाई न संजीत यादव को बरामद किया गया। 21 जुलाई को जब पुलिस ने सर्विलांस की मदद से संजीत के दो दोस्तों को पकड़ा तो पता चला कि उन लोगों ने संजीत की 26 जून को ही हत्या कर दी गई थी। शव को पांडु नदी में फेंक दिया गया था। इसके बाद सीएम योगी के निर्देश पर इस मामले में एक आईपीएस समेत 11 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। पुलिस ने पांडु नदी में कई बार लगातार सर्च अभियान चलाया, लेकिन संजीत का शव हाथ नहीं लगा।
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