उत्तर प्रदेश की संभल लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद शफीकुर्रहमान बर्क ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और एएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी के सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि, अयोध्या में बाबरी मस्जिद थी और हमेशा रहेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि, अपने ताकत के बल पर कोर्ट से फैसला कराया गया और बुनियाद रख दी। यह कानूनी इंसाफ नहीं है। संगे बुनियाद रखना सेक्युलरिज्म और जम्हूरियत का कत्ल करना है। बता दें कि, पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर की नींव रखी है। इस बाबत बीते साल 9 नवंबर को रामलला विराजमान में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि, अयोध्या राम की जन्मभूमि है।
हम अल्लाह के भरोसे, मस्जिद को कोई मिटा नहीं सकता
शफीकुर्रहमान बर्क ने कहा कि, इस जम्हूरी मुल्क में यह जो अमल में हो रहा है, उन्होंने (पीएम मोदी) शायद इस पर कभी गौर नहीं किया हम जो कुछ भी यहां कर रहे हैं वह किस बुनियाद पर कर रहे हैं। खैर ठीक है। उनकी सरकार है, उन्होंने ताकत के बलबूते पर संग-ए-बुनियाद रख दी। अदालत से भी अपने पक्ष में फैसला करा लिया। मुसलमानों को खौफ खाने की जरूरत नहीं है।
यह कानूनी इंसाफ नहीं है। बल्कि हमारे साथ बहुत बड़ी नाइंसाफी हुई है। लेकिन हमने सब्र से काम लिया है। आज भी हम अल्लाह के भरोसे पर यह उम्मीद करते हैं कि इंशा अल्लाह यह जगह हमेशा मस्जिद थी, मस्जिद है और मस्जिद रहेगी। इसको कोई मिटा नहीं सकता है।
ओवैसी ने यह कहा था?
इससे पहले पांच अगस्त को राम मंदिर के भूमि पूजन से पहले एआईएमआईएम के चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट कर लिखा था कि बाबरी मस्जिद थी और रहेगी। इंशाअल्लाह। इसके साथ उन्होंने बाबरी मस्जिद और बाबरी मस्जिद विध्वंस की एक-एक तस्वीर भी साझा की थी। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने तुर्की के हाया सोफिया का उदाहरण देते हुए कहा था कि बाबरी मस्जिद हमेशा एक मस्जिद रहेगी। हाया सोफिया मस्जिद हमारे लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है, लेकिन न्याय को शर्मिंदा किया है। इस पर बाबरी मस्जिद के पक्षकार रहे इकबाल अंसारी ने पलटवार किया था। उन्होंने कहा था कि जब कोर्ट ने फैसला सुना दिया तो झगड़ा कहां है। अब कोई झगड़ा नहीं बचा है।
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