उत्तर प्रदेश के कानपुर में लैब टेक्नीशियन संजीत यादव के अपहरण के बाद हत्या कर पांडु नदी में शव फेंकने की बात हत्या आरोपियों ने कबूली थी लेकिन पांडु नदी में चल रहे सर्च ऑपरेशन में पुलिस के हाथ अभी तक शव नहीं लगा है। इसके बाद पुलिस को अब हत्या आरोपियों के द्वारा बताई गई कहानी पर संदेह होने लगा है। अब पुलिस हत्या आरोपियों के नारको टेस्ट की तैयारी कर रही है।
लैब टेक्नीशियन संजीत यादव के शव बरामद करने के लिए रोजाना पुलिस सर्च ऑपरेशन चला रही है। इसी के चलते रोज की तरह पुलिस ने शनिवार को पांडु नदी में चार मोटरबोट उतार कर सर्च ऑपरेशन में लगे लोगों की संख्या भी बढ़ा दी और सर्च ऑपरेशन रोजाना की तरह कल 20 किलोमीटर से भी आगे निकल गया। लेकिन अभी तक सर्च टीम के हाथों सफलता नहीं लगी है।
सर्च ऑपरेशन में लगे दरोगा अभिलाष कुमार ने बताया कि पांडु नदी में सर्च ऑपरेशन बराबर चल रहा है टीमें आरोपियों के द्वारा बताए गई जगह पर चार से पांच बार सर्च कर चुके हैं लेकिन अभी कुछ भी हाथ नहीं लगा है फिर भी हम लोग तेजी के साथ आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि सर्च ऑपरेशन में गोताखोरों की टीम भी अलग लगी हुई है जो पांडु नदी के अंदर भी सर्च ऑपरेशन चला रही है।
हत्यारोपी कर रहे हैं पुलिस को गुमराह
पुलिस सूत्रों की माने तो घटना में पांच आरोपितों ज्ञानेंद्र, कुलदीप, नीलू, रामजी और प्रीति को जेल भेजा था। रामजी कोरोना संक्रमित होने के कारण नारायणा अस्पताल में भर्ती है। संजीत का शव, कत्ल के दौरान रही रस्सी और उससे जुड़ा कोई मजबूत साक्ष्य पुलिस के पास नहीं होने के कारण कुलदीप, ज्ञानेंद्र और नीलू को कस्टडी रिमांड पर लिया गया था। तीनों की निशानदेही पर 48 घंटे में पुलिस ने पांडु नदी से लेकर फिरौती देने वाले स्थान गजैनी हाईवे, रेलवे ट्रैक, राम गंगा नहर समेत गली-गली खाक छानी। इसके बाद भी कोई साक्ष्य नहीं जुटा सकी।
रिमांड का समय पूरा होने से पहले ही आरोपितों का डॉक्टरी परीक्षण कराकर उन्हें जेल में दाखिल किया था। जिसके चलते पुलिस को भी लगने लगा है कि पुलिस को गुमराह कर आरोपी मुकदमें को कमजोर करने में लगे हैं। यही कारण है कि पुलिस हर तरह से आरोपियों के द्वारा बताए गए हर स्थान की एक नहीं कई कई बार तलाश कर चुकी है। पुलिस के हाथ अभी तक ना तो शव बरामद हुआ है। ना ही कोई ऐसा अहम सबूत लगा है जिससे कि हत्या आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा पुलिस कोर्ट से दिलवा सके। अब ऐसे में पुलिस के पास सिर्फ और सिर्फ नारको टेस्ट का रास्ता ही बचा है और जल्द ही पुलिस सभी हत्या आरोपियों की नारको टेस्ट की कार्रवाई को भी पूरा करवा सकती है।
गौरतलब है कि लैब टेक्नीशियन संजीत यादव का 22 जून को अपहरण हो गया था जिसके बाद पुलिस अपहरण के 31 दिन के बाद जाकर कहीं संजीत यादव के आरोपियों को गिरफ्तार कर पाई थी जिसको लेकर पुलिस विभाग की पूरे प्रदेश में किरकिरी हुई थी और लग रहे लापरवाही के आरोप के चलते आनन-फानन में कई अधिकारियों पर गाज भी गिर गई थी।
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