उत्तर प्रदेश के अयोध्या में पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर का भूमि पूजन किया। विपक्षी दलों के तमाम नेताओं ने अपने-अपने अंदाज में इसका स्वागत किया। इससे एक तबका खासा नाराज हो उठा है। गुरुवार को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की कोआर्डिनेशन कमेटी की बैठक हुई। प्रेसवार्ता में बैठक की जानकारी देते हुए वक्ताओं ने कहा- बसपा प्रमुख मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव, दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अनमॉस्क हो चुके हैं। मुसलमानों की लीडरशिप का दावा करने वाले भी चुप रहे। इन सभी नेताओं के खिलाफ कोआर्डिनेशन कमेटी खड़ी होगी। इस कमेटी का गठन सीएए-एनआरसी के विरोध के लिए किया गया था।
कोआर्डिनेशन कमेटी के सदस्य और एएमयू में पीएचडी कर रहे छात्र इमरान जलाली ने कहा अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर के लिए भूमि पूजन हुआ। जिस पर तमाम नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया थी। ऐसा लगता है कि, इन लोगों के चेहरे पर पर्दे थे जो अब बेनकाब हो चुके हैं। मुसलमानों की लीडरशिप का दावा करने वाले अहमद पटेल, सलमान खुर्शीद के साथ और जितने भी मुस्लिम नेता हैं, उन सब नेताओं के चेहरे से नकाब उठ चुका है। यह लोग सेकुलर नहीं थे और केवल अपनी पार्टी के नेता थे और जो पार्टी का निर्णय होता था वही इन लोगों का अपना डिसीजन होता था। इन लोगों का अपना कोई सेल्फ डिसीजन नहीं होता था।
मायावती से लेकर अखिलेश यादव या केजरीवाल यह सभी के सभी अनमास्क हो चुके हैं। इन लोगों ने एक बार भी कोर्ट के डिसीजन का हवाला नहीं दिया। कोर्ट ने खुद माना था कि, वहां मस्जिद थी। मंदिर नहीं था। मंदिर तोड़े जाने का सबूत नहीं मिला, यह भी सुप्रीम कोर्ट ने माना। लेकिन, उसके बावजूद भी इन नेताओं ने इन पॉइंट्स पर कभी कोई कमेंट नहीं किया और सिर्फ मुबारकबाद दी। इस इन सबके गुरु राजीव गांधी का सपना पांच अगस्त को अब पूरा हो चुका है।
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