उत्तर प्रदेश में सरयू और राप्ती नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। इससे राज्य के 17 जिलों के 666 गांव प्रभावित हैं। इनमें से 446 गांवों का संपर्क सड़कों से टूट गया है। इसी बीच गोंडा में तरबगंज तहसील में भिखारीपुर-सकरौर तटबंद का 45 मीटर हिस्सा कट गया है। इसके चलते 14 गांवों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। प्रशासन की मदद से ग्रामीण तटबंध को बचाने में जुटे हैं। शुक्रवार को योगी सरकार में पिछड़ा वर्ग व दिव्यांग जन कल्याण मंत्री अनिल राजभर और जल शक्ति राज्य मंत्री बलदेव सिंह ओलख ने बाढ़ प्रभावित गांवों का हवाई सर्वेक्षण किया। गेस्ट हाउस में महज आधे घंटे में समीक्षा कर दोनों मंत्री फिर से हवा में उड़ गए।
चार लाख क्यूसेक से अधिक छोड़ा गया पानी
कैबिनेट मंत्री अनिल राजभर ने कहा कि नेपाल से करीब 4 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने के बाद नदियों में बाढ़ की स्थिति पैदा हुई है। जल दबाव से बांध का कुछ हिस्सा भले ही कट गया हो, लेकिन तत्काल अधिकारियों द्वारा युद्धस्तर पर किए जा रहे मरम्मत की वजह से बाढ़ का फैलाव रोकने मे सफल रहे।
बख्शे नहीं जाएंगे लापरवाह अधिकारी
हर साल भिखारीपुर तटबंध की मरम्मत के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन हर बार ग्रामीणों को बाढ़ की विभीषिका झेलनी पड़ती है। इस पर मंत्री ने कहा कि बांध कटने को लेकर जांच करायी जा रही है।लापरवाही बरतने वाले अभियंताओं व प्रशासनिक अधिकारियों को दंडित किया जाएगा।
पशुओं के लिए हो चारे का इंतजाम
जलशक्ति मंत्री ओलख ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी और मंत्रालय दिनरात पूरी तन्मयता और लगन से बाढ़ की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मंत्रियों ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर राहत सामग्रियां वितरित की जाए। पशुओं के चारे की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
यह जिले बाढ़ से प्रभावित
लखीमपुर, पलिया, अयोध्या, बलिया, बाराबंकी, गोरखपुर, महाराजगंज, गोंडा, बहराइच, बलरामपुर, श्रावस्ती, बस्ती, सीतापुर, सिद्धार्थनगर, संतकबीरनगर समेत तराई के 17 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। गोंडा में तरबगंज क्षेत्र के ऐली परसौली गांव के विशुनपुरवा मजरे के पास गुरुवार को भिखारीपुर सकरौर तटबंध का करीब 45 मीटर हिस्सा कटकर नदी मे समा गया था। इससे आसपास के करीब दो दर्जन पुरवे घाघरा व सरयू नदियों मे आयी बाढ़ की जद में आ गए हैं। लगातार जारी कटान से तटवर्ती सौनौली मोहम्मदपुर, ऐली परसौली, तुलसीपुर मांझा समेत करीब 24 गावों के ग्रामीण भयभीत हैं।
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