राष्ट्रभक्ति किस तरह लोगों के अन्दर कूट – कूट कर भरी है इसकी बानगी आज बाराबंकी में दिखाई दी जहां बाढ़ का कहर भी राष्ट्रभक्ति को नही डिगा सका। बाढ़ की विकरालता के बावजूद विद्यालय में तिरंगा बड़ी शान से फहराया और राष्ट्रगान की मुखर ध्वनि ने साबित कर दिया कि देश प्रेम से बड़ा कोई प्रेम नही। स्वाधीनता दिवस पर ऐसा नजारा आंखों और दिल को सुकून देने वाला था। यहां के एक विद्यालय में पानी देखकर शिक्षकों ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए तो ग्रामीणों ने नाव से पहुंच कर अपने राष्ट्रधर्म को निभाया।
पूरे भारतवर्ष में आज स्वाधीनता दिवस के अवसर पर सभी संस्थानों पर देश की शान तिरंगा पूरी आन बान और शान के साथ फहरा रहा है तो वही यह तिरंगा बाराबंकी के तहसील सिरौलीगौसपुर के गाँव सनावा और तेलवारी के विद्यालय में भी फहरा रहा है जहां एक दिन पहले तक कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था क्योंकि यह इलाका बाढ़ से घिरा हुआ है और इसके विद्यालय में भी पानी पूरी तरह से भरा हुआ है ।
तेलवारी गांव के निवासी जगपाल सिंह सूर्यवंशी ने बताया कि यहां पर तैनात शिक्षक झंडारोहण को आये जरूर थे मगर पानी देख कर वह भी हार मान गए तब वह लोग यहां आकर झंडारोहण किया है। इस स्कूल में रसोइए का काम करने वाले साहब दीन ने बताया कि पहली बार उन लोगों ने झंडारोहण किया है अन्यथा हमेशा यहां शिक्षक ही करते आये हैं मगर आज जब शिक्षकों का साहस जवाब दे गया तो वह कुछ ग्रामीणों के साथ झंडारोहण के लिए आए हैं। भारत माता के प्रति अपना कर्तव्य निभाने में उन्हें सुखद अनुभूति हो रही है।
सिरौली-गौसपुर के प्राथमिक विद्यालय में भी फहराया गया तिरंगा
वहीं बाढ़ग्रस्त तहसील सिरौली-गौसपुर की है जहां के प्राथमिक विद्यालय में भी झंडारोहण किया गया। यह विद्यालय भी बाढ़ के पानी से लबालब है लेकिन यहां भी देश के प्रति अपनी कर्तव्यनिष्ठा साफ दिखाई दी यहां विधिवत रूप से अतिथि की उपस्थिति में प्रधानाचार्य ने झंडारोहण भी किया और मिष्ठान का वितरण भी किया।
सनावा प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक रामेन्द्र कुमार ने बताया कि जब सैनिक विषम परिस्थितियों में अपना कर्तव्य का पालन करते है तो हम क्यों नहीं कर सकते। इसी कारण हमारा निश्चय था कि बाधा कितनी भी आये हमे झंडारोहण जरूर करना है और हमने किया भी ।
विद्यालय में अतिथि रूप में पधारे भाजपा नेता समरजीत ने बताया कि स्वाधीनता दिवस हमें अपने कर्तव्यों का तो बोध कराता ही है साथ ही गुलामी की बेड़ियों से कैसे आजादी मिली इसका भी बोध कराता है । इस लिए इसे एक पर्व के रूप में मनाना हमारी प्राथमिकता है चाहे कितनी भी बड़ी बाधा क्यों न हो हम इसे मनाएंगे जरूर ।
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