प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच अगस्त को अयोध्या में भगवान राम की जन्मभूमि पर भव्य व दिव्य मंदिर की नींव रखी। इससे पहले तीन दिनों तक वैदिक पूजन विधि चली जो 32 सेकेंड के शुभ मुहूर्त में प्रधानमंत्री से पूर्णाहुति से संपन्न हुई। 35 मिनट चली इस पूजा पद्धति को संपन्न कराने वाले मुख्य आचार्य पंडित गंगाधर पाठक अपने धाम मथुरा पहुंच चुके हैं। गुरुवार को दैनिक भास्कर ने पंडित गंगाधर से बात की। उनसे यह जानने की कोशिश की कि वे पीएम के सामने विशिष्ट यजमान और दक्षिण की बात दोहरा रहे थे, वह क्या थी? बता दें कि, पंडित गंगाधर पाठक ने राम मंदिर के शिला पूजन का शुभ मुहूर्त निकाला था, जिसे शंकराचार्य स्वरुपानंद ने विनाशकारी बताया था। एक रिपोर्ट...
17-18 मिनट पहले पीएम आ गए थे राम जन्मभूमि
आचार्य गंगाधर पाठक ने कहा कि, राम जन्मभूमि में मंदिर के लिए शिलापूजन महज 15 मिनट में संपन्न होना था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हनुमानगढ़ी में पूजा अर्चना कर 17-18 मिनट पहले ही राम जन्मभूमि में बनी वेदी पर आ गए थे। इसलिए मैंने पूजा का विधान बढ़ा दिया था। पूजन तो तीन दिन से चल रहा था। शिलापूजन की विशिष्ट पद्धति में 9 शिलाओं का पूजन हुआ। उन्होंने यह भी साफ किया कि, शिलान्यास कार्यक्रम के रुप में इस कार्यक्रम की प्रतिष्ठा रही, लेकिन शिला पूजन हुआ है। करीब 35 मिनट तक पूजा चली। भगवान राम के मंदिर की पूजा कराना और पीएम का यजमान होना, यह मेरे लिए ईश्वर का आशीर्वाद है। इसीलिए मैं बार-बार विशिष्ट यजमान होने की बात दोहरा रहा था। कहा कि, लोकतंत्र का सर्वाधिक उच्चकोटि का नेता अपने नाम व गोत्र का नाम लेकर व्यक्ति कह रहा है कि, मैं मंदिर बनाऊंगा। यह एक स्फूर्तभारत का परिचायक है।
ट्रस्ट ने मुझे पीएम से दक्षिणा मांगने से रोका
आचार्य पाठक बताते हैं कि, इससे पहले भी मैं मोदीजी से मिल चुका है। वे मुझे नाम से जानते हैं। यही वजह थी कि, बेहद हंसी खुशी वातावरण में शिलापूजन समारोह संपन्न हुआ। मैंने उनसे इशारों में दक्षिणा भी मांगी। क्योंकि ब्राह्मण का दक्षिण मांगना अपराध नहीं है। मैंने उनसे कहा कि, आप जैसे चक्रवर्ती यजमान हो जाएं तो मुझे दक्षिणा में यही चाहिए कि अभी भी भारतवर्ष में सनातनधर्मियों के लिए कई समस्या है। मै वहां तीन बाते रखना चाहता था कि, भारत में गोवंश की हत्या रुके। काशी और मथुरा का झगड़ा समाप्त हो। इस बात की चर्चा मैंने ट्रस्ट से की थी। लेकिन मुझे ट्रस्ट ने रोक दिया गया कि मोदी जी के सामने यह बात न रखी जाए, नहीं तो वे बाध्य हो जाएं। विरोधियों को भी मुद्दा मिल जाएगा। इसलिए मैं शांत रहा।
शिवभक्तों को मिले काशी, कान्हाभक्तों को मथुरा, गो हत्या पर लगे रोक
अंदर से बात निकलना चाहती थी, लेकिन मैंने उसे किसी प्रकार से रोक लिया। इसलिए मैंने उनके सामने कहा कि, भारत के सनातनियों को दो चार समस्याओं से दो चार होना पड़ता है। पांच अगस्त का यह शुभ मुहूर्त कुछ और कारणों से जुड़ जाए। यह बात मैंने छिपाकर कही। लेकिन अब यह बात देश के सामने होनी चाहिए। एक खून का कतरा यदि धरती पर गोमाता का गिरता है तो वह कलंकित होती है। इसलिए गोहत्या पर रोक लगाई जाए। मथुरा श्रीकृष्ण की जन्मभूमि है। यह कृष्ण के भक्तों को मिले और काशी शिवभक्तों को मिले। यहां कभी किसी मुस्लिम का नाता नहीं रहा है।
शंकराचार्य का उनके चेलों ने कराया अपमान
आचार्य गंगाधर पाठक कहते हैं कि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद गिरी महाराज के अनुरोध पर करीब एक माह पूर्व शास्त्रसम्मत रूप से शोध कर 5 अगस्त के मुहूर्त को मान्यता दी थी। लेकिन उस पर शंकराचार्य स्वरुपानंद सरस्वती ने विवाद खड़ा किया। कुछ कहीं से राग द्वेष होते हैं। शंकराचार्य भारतवर्ष के अराध्य व नेता हैं। 5 अगस्त का निर्णय हो गया था। क्योंकि मैंने ही मुहूर्त बताया था इसलिए मुझे उनकी बात का खंडन करना पड़ा। शंकराचार्य खुद चल फिर नहीं पाते। उनके कुछ चेले ने आग लगाई और किसी दूसरे चेले ने लेख लिखकर उन्हें सुना दिया और फिर शंकराचार्य को सुना दिया इसके बाद प्रकाशित कर दिया। शंकराचार्य का उनके चेलों ने अपमान कराया है। मैंने शंकराचार्य को वॉट्सऐप भी किया था कि, मुहूर्त का खंडन कर सकते हैं तो करें, लेकिन उसका खंडन नहीं किया गया। मेरे उनके साथ अच्छे संबंध हैं।
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