मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि की पूरी जमीन के स्वामित्व मामले को लेकर आज सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में सुनवाई होगी। सुनवाई के बाद अदालत अपना निर्णय देगा कि ये सिविल सूट स्वीकार किया जाए या रिजेक्ट। यह याचिका हिंदू आर्मी नाम के संगठन के अध्यक्ष मनीष यादव ने खुद को कृष्ण का वंशज बताते हुए 15 दिसंबर को दाखिल किया था। जिस पर बीते 22 दिसंबर को सुनवाई होनी थी, लेकिन उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी थी।
1968 में हुए समझौते को अस्तित्व विहीन बताया
याचिका में श्री कृष्ण जन्म स्थान परिसर स्थित इबादतगाह के साथ ही अन्य अतिक्रमण के बारे में बताया गया है। वहां से अतिक्रमण हटाकर उक्त भूमि को श्री कृष्ण जन्म भूमि ट्रस्ट के सुपुर्द करने की मांग करते हुए तथा 12 अक्टूबर 1968 को श्री कृष्ण जन्म सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह के बीच समझौते का जिक्र करते हुए वाद संख्या 43/1967 में दाखिल समझौते को विधिक अस्तित्वहीन बताया है।
याची के अधिवक्ता पंकज जोशी ने बताया कि उच्च न्यायालय इलाहाबाद ने प्रथम अपील में कहा था कि पं. मदन मोहन मालवीय द्वारा अपनी अर्जित उपरोक्त संपत्ति को श्री कृष्ण जन्म भूमि सेवा ट्रस्ट को हस्तांतरित की थी। उक्त संपत्ति का मालिकाना हक आज भी उच्च न्यायालय के आदेशानुसार ट्रस्ट के पास है व उपरोक्त समझौते में ट्रस्ट पक्षकार नहीं है।
संपत्ति ईदगाह मस्जिद से ट्रस्ट को सौंपी जाए
ऐसी स्थिति में जो व्यक्ति या ट्रस्ट पक्षकार नहीं है समझौते पर उसकी सहमति कैसे मानी जा सकती है। याची के अधिवक्ताओं ने उक्त तथ्य को रखते हुए कोर्ट से निवेदन किया है कि उक्त संपत्ति को ईदगाह मस्जिद से ट्रस्ट को दिया जाए।
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