उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जेल में रेप के दोषी आसाराम की फोटो लगाकर कैदियों को कंबल वितरण करने की जांच पूरी हो चुकी है। सूत्रों के अनुसार, जांच में जेल अधीक्षक राकेश कुमार, जेलर राजेश राय और 4 वार्डर दोषी पाए गए हैं। जल्द ही सभी दोषी अफसरों व कर्मियों पर कार्रवाई हो सकती है। किसी को वहां से हटाया जा सकता है तो किसी का वेतन बाधित हो सकता है। हालांकि DG जेल आनंद कुमार ने संकेत दिए हैं कि दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
क्या था प्रकरण?
21 दिसंबर को रेप के दोषी आसाराम की फोटो लगाकर शाहजहांपुर जेल में कैदियों को कंबल बांटे गए। पीड़िता इसी शहर की है। जेल प्रशासन ने प्रेस नोट जारी करके इसे सरकारी कार्यक्रम बना दिया था। इसमें बताया गया था कि लखनऊ स्थित आसाराम आश्रम की तरफ से कंबल भेजे गए हैं। अर्जुन और नारायण पांडेय की ओर से कंबल बांटे गए। हैरानी की बात है कि अर्जुन और पुष्पेंद्र आसाराम केस में गवाह की हत्या के आरोपी हैं। वे इसी जेल में बंद रहे हैं और फिलहाल जमानत पर हैं।
मामले ने तूल पकड़ा तो जेल अधीक्षक राकेश कुमार ने मामले पर बेतुका सफाई दी। कहा कि रेप केस के गवाह की हत्या के आरोपी जमानत पर बाहर हैं। उन्होंने बंदियों को कंबल बांटने की इच्छा जताई थी, इसलिए इजाजत दे दी गई थी।
इस प्रकरण में विश्व हिंदू परिषद भी कूद पड़ा था। दोषी अफसरों पर कार्रवाई के लिए प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा था। वहीं, पीड़िता के पिता ने भी जेल में आसाराम के नाम पर कार्यक्रम पर आपत्ति जताई थी। इसी के बाद DG जेल आनंद कुमार ने मामले में जांच के आदेश दिए। उन्होंने DIG आरएन पांडे को जांच सौंपी थी। DIG ने अपनी रिपोर्ट DG को सौंप दी है।
आसाराम उम्रकैद की सजा काट रहा
आसाराम ने 2013 में शाहजहांपुर की ही एक छात्रा से रेप किया था। 2018 में राजस्थान की जोधपुर कोर्ट ने इस मामले में उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
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