कोरोनावायरस (कोविड-19) के मामले में देश में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। नतीजा आधुनिकता के इस दौर में लोग भारत की प्राचीन पद्धति घरेलू नुस्खों की तरफ लौट रहे हैं। गर्म पानी के सेवन के साथ स्वाद में कसैले काढ़ा को पीने की सलाह दी जा रही है। इसी क्रम में भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर लक्ष्मीकांत बाजपेई ने रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए आयुर्वेद पर आधारित तीन तरह की औषधि- काढ़ा, नस्य पोटली और नीम व हल्दी का सैनिटाइजर तैयार किया। उन्होंने अब मेरठ में एक हजार काढ़ा की शीशी, नस्य पोटली लोगों तक पहुंचाई है। वे बताते हैं कि, 22 मार्च से घर के बाहर नहीं निकले हैं। समय मिलने के कारण लोगों की सेवा में जुटा हूं।
इन्हेलर की तरह बनाया नस्य पोटली, फेफड़ों को देगा मजबूती
विक्स इन्हेलर का नाम तो आपने जरूर सुना होगा। ठीक उसी तर्ज पर नस्य पोटली है। इसका प्रयोग करने के लिए लोगों को इसे सूंघना पढ़ता हैं। दिन में पांच बार प्रयोग करने से फेफड़े तंत्र को ताकत मिलती है। सांस रोगियों यह कारगर है। इसके निर्माण में सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, छोटी इलाइची, कपूर, अजवाइन और लौंग जैसी जड़ी बूटियों से से किया गया है। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने अबतक करीब पांच सौ ज्यादा पोटली का वितरण करवाया है।
रोग प्रतिरोधक काढ़ा और सैनिटाइजर
डॉ बाजपेई बताते हैं कि, पश्चिमी यूपी में कोरोना वायरस के मामले बढ़ने के बाद सैनिटाइजर अचानक बाजार से गायब हो गया। इस संकट के काल में हमनें अपने औषधी भंडार में नींबू रंग का पारदर्शी सैनिटाइजर बनवाया है। जिसे जरूरतमंद लोगों तक निशुल्क पहुंचाया जा रहा है। इसके साथ ही 200 एमएल की इम्युनिटी वर्धक काढ़ा की शीशी लोगों के घर पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया इस काढ़े में 10 साल के ऊपर वाले एक चम्मच दिन में दो और जो 50 साल की उम्र से ज्यादा हैं, वह दो-दो चम्मच गर्म पानी में पी रहे हैं। आवंला, गिलोय, अश्वगंधा, शतावर, हल्दी काली मिर्च, छोटी पीपल, सोंठ, तुलसी पत्र, नीम पत्र और चिरैयता से तैयार किया गया है।
आयुर्वेदिक ग्रंथों के सहारे जरुरतमंदों की मदद
डाक्टर लक्ष्मीकांत पेशे से आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं, जो फुर्सत के क्षणों में आयुर्वेदिक ग्रंथों से लोगों की मदद के लिए उपचार बता रहे हैं। वो आंवला समेत अन्य फलों में पाए जाने वाले रसायनों में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की क्षमता पर शोध कर रहे हैं। गूगल पर पड़े शोध पत्रों में वर्णित कारगर रसायनों की सूची बना रहे हैं। चरकसंहिता में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली कई जड़ी बूटियों का जिक्र है। लॉकडाउन में सामाजिक चहल पहल एवं सियासत से मीलों दूर लक्ष्मीकांत अब भी जनता की सेवा में रमे हुए हैं। वो रसोई से लेकर मसालों में पाए जाने वाले आयुर्वेदिक रसायनों के सटीक सेवन की जानकारी देकर लोगों को घर में ही सुरक्षित रहने की सीख दे रहे हैं। उन्होंने बताया 6 हजार से ज्यादा मास्क अपने मंडल अध्यक्षों के जरिए जनता में बंटवाया है। इसके साथ हो 12 किलो के पांच किलो, आटा, चार किलो चावल, एक किलो दाल, अन्य खाने की सामग्री के पैकेट 500 से ज्यादा क्षेत्र में बंटवा चुके हैं।
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