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भूखों के लिए किन्नरों ने बढ़ाया हाथ, धर्मगुरुओं ने कब्रिस्तानों पर लगाया बोर्ड- फातिहा पढ़ने न आएं

लॉकडाउन के बीच जरूरतमंदों की मदद के लिए उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में किन्नर सामने आए हैं। किन्नरों ने सूर्योदय से शाम तक लोगों की सेवा को ही अपना लक्ष्य बनाया है। किन्नरों की अगुवाई कर रहीं बबली मौसी ने सैकड़ों गरीबों के लिए खुद खाना बनाया और वितरित किया है। वहीं, प्रशासन की अपील पर शहर के कब्रिस्तानों में बोर्ड लगाकर फातिहा पढ़ने पर रोक लगा दी है। धर्मगुरुओं का कहना है कि, कब्रिस्तानों में भी लोगों की भीड़ इकट्ठा न हो, इसलिए ये कदम उठाया गया है।

किन्नर ने कहा- नर की सेवा ही नारायण सेवा है

कोरोनावायरस (कोविड-19) महामारी से लड़ाई में 14 अप्रैल तक घोषित लॉकडाउन का आज 14वां दिन है। इन हालातों में रोज कमाने खाने वालों के सामने पेट भरने का संकट है। ऐसे में तमाम समाजसेवी लोगों की मदद कर रहे हैं। इसी क्रम में झांसी में किन्नर बबली मौसी ने इन दिनों नर सेवा को ही नारायण सेवा मान लिया है। वे अपने सहयोगियों के साथ सैकड़ों गरीबों के लिए खुद खाना बना रही हैं। इसके बाद इनकी टोली शहर के जीवन सहाय चौराहे में निकलती है। इसके बाद इन्होंने गरीबों को बुला-बुलाकर खाना खिलाया।

बबली मौसी ने कहा- वैश्विक महामारी करोना संक्रमण में जरूरतमंदों को खाना खिलाना या किसी भी प्रकार की सेवा करना भगवान की सेवा करने से कम नहीं है। आज जब देश में इतनी बड़ी महामारी का संकट है, ऐसे में हम सब का कर्तव्य है कि मिलकर इस संकट से पार पाएं। फिलहाल इन किन्नरों से दूरी बनाकर रहने वाले लोग अब इनके हुनर और दरियादिली को सलाम कर रहे हैं।

कब्रिस्तानों पर लगाया गया बोर्ड।

शब्बे बारात में कब्रिस्तानों पर उमड़ती है भीड़
दिल्ली के निजामुद्दीन से निकले जमातियों के चलते देश में कोरोनावायरस के केस तेजी से बढ़े। इसको देखते हुए प्रशासन ने सभी धर्म गुरुओं के साथ बैठक की और शबे बरात में भीड़ इकट्ठा न हो इसके लिए अपील की। धर्मगुरुओं ने प्रशासन को हर संभव मदद का आश्वासन दिया और कब्रिस्तान में नोटिस बोर्ड लगा दिए गए। जिसमें कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन का पालन करने का निर्देश दिए गए है और कब्रिस्तानो में न आने के बात कही गयी है। मुफ्ती इमरान नदवी ने कहा- शबे बारात मुस्लिम धर्म में बड़ा त्योहार माना जाता है। इस बार शबे बारात 9 अप्रैल को मनाया जाने वाला है। इस दिन मुस्लिम समुदाय के लोग अपने बुजुर्गों की कब्रों पर जाते हैं और उन पर फूल चढ़ाकर फातिहा पढ़कर उनके लिए दुआ करते हैं। इस दिन कब्रिस्तानो में हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ जमा होती है।



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किन्नर बबली मौसी खुद जरूरतमंदों के लिए खाना बनाती हैं। फिर उसका लोगों में वितरित करती हैं। बबली मौसी ने कहा- इससे बड़ी कोई सेवा नहीं।


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