
कहा जाता है उत्तर प्रदेश में दो चीजें बहुत मशहूर हैं। एकलखनऊ की शाम तो दूजी बनारस की सुबह। जिसका लुत्फ उठाने के लिए देश विदेश से पर्यटक आते हैं।लेकिन कोरोना संकट काल मेंभगवान भोले की मोक्ष नगरी काशी इन दिनों देशव्यापी लॉकडाउन के चलतेसूनी है। यहां सात किमी लंबे अर्द्धचंद्राकार गंगा घाट पर्यटकों, कर्मकांडियों की बाट जोह रहे हैं। हर तरफ एक अलग खामोशी है। लॉकडाउन के फेज तीन में थोड़ी सहूलियत मिली तो इक्का दुक्का लोग यहां नजर आ जाते हैं। उनमें से एकबीएचयू के पूर्व एमएस व सीनियर न्यूरोलॉजिस्ट डॉ वीएन मिश्रा भी हैं। उन्होंने यहां के मनोरम घाटों की तस्वीरें अपने कैमरे से क्लिक की हैं। उन्होंने कहा- काशीका ऐसा रंग पूरी दुनियामें कहीं और नहीं है। दरअसल, डॉ. मिश्रा रोज घाटों पर वॉककरके बीमार मरीजों का इलाज करते हैं।
10 फोटो में देखिए गंगा घाट का दृश्य-
ये महाश्मशान मणिकर्णिका घाट है। यहां कभी चिताओं की अग्नि ठंडी नहीं पड़ी। आम दिनों में मणिकर्णिका गली में पैर रखने की जगह भी नहीं होती है। चिताओंके लिए गलियों से लकड़ियां रखी हैं।यहांविदेशी शांति की तलाश में आते थे।

ये तस्वीर आरपीघाट की है। यहां एकमकान की छतपर महारभारत कालीनअर्जुन का रथ बनाया गया है। भगवान श्री कृष्ण सारथी के रुप में हैं।

पंचगंगा घाट की सीढ़ियां,जहां कभी कबीर दास जी को उनके गुरु रामानंदचार्य जी से आशीष ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।

पंचगंगा घाट पर रखा सैकड़ो दीपों वाला बड़ा दीपक। लाकडाउन की वजह से ये प्रज्जवलितनहीं हो पा रहा है। देव दीपवली पर पूर्ण दीपों को जलाया जाता है।

महाश्मशान मणिकर्णिका घाट पर अपनोंकी जलती चिता को निहारते लोग। अन्य प्रदेशों-जिलों से अब लोग यहांनहीं आ पा रहे है। 10 से 15 ही चिताएं रोज जल रही हैं, जबकि सामान्य दिनों में 80 से 100 चिताएं जलती थीं।

सुबह हल्के सूर्य की रोशनी में नहाए घाटों की श्रृंखला में राजघाट पुल का एक नजारा।

घाट की सीढ़ियों पर महादेव का खुला मंदिर। लॉकडाउन के चलते बाबा का श्रृंगार भी नहीं हो पाया।

बूंदी परकोटा घाट पर दीवारों पर कलाकारों द्वारा पेंटिंग उकेरी गयी है, जिसे लाकडाउन में देखने वाला कोई नहीं। ये आकृतियांपर्यटकों को खूब रिझातीहैं।

सुबह की पहली किरणों के साथ हरिश्चंद्र घाट पर मशान नाथ का मंदिर शांत है। आम दिनों में घंटे घड़ियालों से गूंजता रहता है।

दक्षिण भारतीयों से भरा रहने वालेकेदार घाट पर सूर्योदय के बाद पसरा सन्नाटा। जबकि सैकड़ो दर्शनार्थी आम दिनों में यहांस्नान, पूजा पाठ व योगकिया करते थे।

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