उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में छेड़खानी का शिकार हुई अमेरिका में पढ़ने वाली सुदीक्षा की मौत हो गई है। ग्रेटर नोएडा के परी चौक से लगभग 15 किमी दूर उसके गांव डेयरी स्कैनर में मातम पसरा हुआ है। घर पर रिश्तेदारों और मीडिया वालों की भीड़ लगी हुई है। बाउंड्रीवॉल से घिरे घर में पेड़ के नीचे बैठी महिलाओं के बीच मां गीता बार-बार बेटी की फोटो देखकर बेहोश हो रही हैं तो बरामदे में चारपाई पर बैठे पिता की आंखों के आंसू सूख चुके हैं। वह लगातार मीडियावालों और जानने वालों से घिरे हुए हैं।
सुदीक्षा की मौत से कई घरों की रोशन मिट गई
बुजुर्गों के साथ बैठे ओम प्रकाश भाटी से हमारी मुलाकात हुई। बातचीत में पता चला कि वह सुदीक्षा के चचेरे दादा है। उन्होंने बताया कि सुदीक्षा हम सब से बहुत घुली मिली थी। लॉकडाउन में जब स्कूल-कॉलेज बंद हो गए थे तो उसने गांव के ही बन्द पड़े बारातघर में गरीब बच्चों को अपनी बहनों के साथ पढ़ाना शुरू किया था। अभी कुछ दिन पहले उसने मेरे सामने अपनी छोटी बहन से कहा था कि मेरे जाने के बाद भी इन बच्चों को पढ़ाते रहना। ओम प्रकाश कहते है कि सुदीक्षा सिर्फ इस घर के लिए उम्मीद नहीं थी, बल्कि गांव के हर बच्चे के लिए एक उम्मीद की रोशनी थी। सभी उसकी तरह बनना चाहते थे। आज सिर्फ सुदीक्षा नहीं मरी है, बल्कि कई बच्चों की उम्मीद मर गई है।
पढ़ाई का जुनून था इसलिए 40 किमी दूर पढ़ने जाती थी
ओम प्रकाश बताते है कि सुदीक्षा में पढ़ाई का जुनून था। इसलिए वह 40 किमी दूर रोजाना पढ़ने जाया करती थी। शुरूआत से ही वह पढ़ने में अच्छी थी। हालांकि, उसकी पढ़ाई शुरू से ही सरकारी स्कूल में हुई थी। चूंकि उसके पिता जितेंद्र के पास ज्यादा पैसे नहीं थे, लेकिन उसने बेटी को पढ़ाने में कोई कसर नही छोड़ी। चाय की दुकान से जो कमाई होती थी वह अपने बच्चों में लगाता था।
20 अगस्त को जाने वाली थी अमेरिका
ओम प्रकाश बताते है कि 20 अगस्त को वह अमेरिका जाने वाली थी, इसलिए वह अपने मामा से मिलने बुलंदशहर गई थी। उन्होंने बताया कि अभी पिछले महीने की 10 तारीख को मेरी पत्नी यानी सुदीक्षा कि दादी की भी मौत हो गई थी। दससे वह बहुत दुखी थी। दोनों में बहुत पटती थी। दो साल में वह दो बार ही आई है। अबकी बार आई तो सबके लिए कुछ न कुछ लेकर आई थी। अपनी दादी के लिए नेल पॉलिश लेकर आई थी।
मां बार-बार हो रही बेहोश तो पिता को रोने का भी मौका नहीं मिल रहा
गेट के आगे बड़े से आंगन में एक पेड़ के नीचे ही कुछ महिलाएं बार बार सुदीक्षा की मां गीता के चेहरे पर पानी की छींटे मार रही हैं। मां बार-बार होश में आती और बेटी की तस्वीर देख उसकी आंखों से फिर आंसू गिरने लगते और वह फिर बेहोश हो जाती। मीडियाकर्मी उनके करीब जाते लेकिन उनकी हालत देख वापस हो जाते। आंगन के बाद बरामदे में एक चारपाई पर पिता जितेंद्र बैठकर मीडिया को अपनी आपबीती सुना रहे हैं। सुबह से वह बस उनकी आंखों से आंसू तो निकल रहे हैं, लेकिन वह रो नहीं पा रहे हैं। उन्होंने बताया कि रोने का मन है। लेकिन, रोया नहीं जा रहा है। बड़े सपने देखे थे। वह कहती थी कि मैं अपने भाई-बहन को भी अमेरिका ले जाऊंगी। कहती थी पापा आपको चाय नहीं बेचनी पड़ेगी। अब सारे सपने खत्म हो गए। इसके बाद जितेंद्र की आंखों से एक बार फिर आंसू निकल पड़े।
कल घटना हुई आज पहुंचा प्रशासनिक अमला
ओमप्रकाश कहते है कि कल सुबह 8 बजे बिटिया अपने चाचा के साथ मामा के यहां गई थी। जब हादसा हुआ तो लगभग सवा 9 हो रहे थे। थोड़ी देर बाद हम लोगों को भी सूचना मिली तो हम लोग आनन-फानन में पहुंचे। पोस्टमार्टम वगैरह होकर हम लोग साढ़े 3 बजे घर आ गए। इसके बाद आज सुबह से यहां सबका आना शुरू हो गया। उन्होंने कहा हम बस इतना चाहते है कि दोषियों को सजा मिले। क्योंकि आज हमारा परिवार उजड़ा है कल किसी और का परिवार उजड़ सकता है।
चाचा ने कहा बाइक वाले स्टंट कर रहे थे
चाचा सतेंद्र ने मीडिया से बातचीत में कहा कि जब हम लोग बुलंदशहर पर कर गए तो एक बुलेट वाला लगातार पीछा कर रहा था। कभी आगे तो कभी पीछे हो रहा था। टेढ़ा मेढ़ा कर चला रहा था। अचानक से जब उसने ब्रेक मारा है तो मेरी गाड़ी उससे टकरा गई। जिससे मैं आगे गिरा और सुदीक्षा पीछे गिरी और उसका सिर सीधे जमीन से टकराया। जिससे उसकी मौत हो गई।
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